आज एक डरावना सपना देखा । फिर एक बार सच्चाई से रूबरू हुई …
" माँ चली गई थी "
वो दुनिया से हमेशा के लिए जा रही थी और उसको पता चल गया था . बहोत रोका पर नहीं रुकी .
सपना कुछ यूँ था ..
माँ को पता था की वो जाने वाली है , वो तैयारियां कर रही थी ।
अपने लिए नहीं -- हम लोगों के लिए , हमेशा की तरह । जिस तरह मम्मी जब नाना या दादी के घर जाती थी, दो दिन के लिए भी , तो हमारे लिए खाने का पूरा सामान बना कर फ्रिज और कैसरोल में रख कर जाती थी । सब चीज़ें सामने रख कर जाती थी जिससे कुछ भी ढूँढना न पड़े । आंटा गूंधने में हम लोगों क हाथ न दुखें इसलिये ।
अभी उनके बनाये खाने का स्टॉक ख़तम भी नहीं होता था और वो वापस आ जाया करती थी -- हर बार । बिलकुल पहले के जैसे ही माँ इस बार भी जाने की तईयारी में थी , पर इस बार वो खाना नहीं बना रहीं थी । बेचारी समझ ही नहीं पा रही थी की क्या बनाएं की बच्चों के लिए हमेशा के लिए पूरा पड़ जाये ।
अपने लिए नहीं -- हम लोगों के लिए , हमेशा की तरह । जिस तरह मम्मी जब नाना या दादी के घर जाती थी, दो दिन के लिए भी , तो हमारे लिए खाने का पूरा सामान बना कर फ्रिज और कैसरोल में रख कर जाती थी । सब चीज़ें सामने रख कर जाती थी जिससे कुछ भी ढूँढना न पड़े । आंटा गूंधने में हम लोगों क हाथ न दुखें इसलिये ।
अभी उनके बनाये खाने का स्टॉक ख़तम भी नहीं होता था और वो वापस आ जाया करती थी -- हर बार । बिलकुल पहले के जैसे ही माँ इस बार भी जाने की तईयारी में थी , पर इस बार वो खाना नहीं बना रहीं थी । बेचारी समझ ही नहीं पा रही थी की क्या बनाएं की बच्चों के लिए हमेशा के लिए पूरा पड़ जाये ।
हाँ मगर तैयारियों के लिए वक़्त कम था इसलिए वो हमें सब कुछ बता देना चाहती थी … जैसे :
- सारा सामान कैसे कहाँ पर रखा हुआ है ।
- चाबियाँ कहाँ हैं ।
- मम्मी के गहने कहाँ पर रखें हैं और वो उन्होंने कब लिया था सारी यादों के साथ ।
- पापा की कौन सी क्या आदत है उनको कब क्या चाहिए होता है ।
- पापा को गुस्सा आता है तो क्या करते है।
- भैया का ध्यान रखना है । छोटा है न वो । जैसे हमेशा कहती हैं उसके बारे में।
- उसको डांटना नहीं ।
- अपनी तबियत का खयाल रखना । MRI करवा लेना । डांस मत करना ।
- बहन जब ज्यादा सीरियस हो जाए मेरे जाने के बाद तो उसको समझा देना , वो तो समझदार है , समझ जाएगी ।
ये सब बातें जो वो आज बता रही थी , न जाने कितनी बार बता चुकी थी बचपन से । पर उसके मायने , आज पहली बार समझ आ रहे थे..
आज माँ कर हर एक शब्द मुझे अक्षर-सह याद है क्यूंकि मुझे पता था की शायद ये --
आखिरी हो ।
आज माँ कर हर एक शब्द मुझे अक्षर-सह याद है क्यूंकि मुझे पता था की शायद ये --
आखिरी हो ।
अचानक सपने में फिर वो दिन आ गया जिसकी तैयारियां माँ ने पहले ही कर दी थी । घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था । माँ नहीं थी पर सारा काम माँ के supervision में ही हो रहा था । जैसे उसने plan किया था , जैसा बताया था बिलकुल वैसे ही। लोग माँ को ले कर जाने वाले थे । पर तभी मुझे और मेरी बहन को एक confusion हुई की माँ ने क्या देने को कहा था " बिछिया" या "अंगूठी" । हम दोनों परेशान थे और सोच रे थे की माँ ने क्या कहा था । समझ नहीं आ रहा था । लग रहा था की काश माँ होती तो तुरंत clear कर देती । हमने मन ही मन एक बेवकूफी वाली बात करी , सपना जो था , की माँ अगर तुम सुन रही हो तो please एक आखिरी बात बता देना फिर भले सो जाना ।
सपने की हद तो तब हुई जब माँ सच में उठ गई और उसने बोला " बताया तो था की क्या करना है , तुम लोगों को कुछ याद नहीं रहता , बताया था ना की अंगूठी सोने की है तुम लोगों के काम आएगी , बस बिछिया डाल देना , सस्ती है, उसी में जाने देना मुझे "
उस एक पल माँ के लौट आने से लगा की जन्नत मिल गई हम लोगों को. हम तीनो माँ से चिपक गए और बोले की माँ रुक जाओ । आज वो सब बोलने के लिए थोडा सा वक़्त मिल गया था जो अब तक नहीं बोल पाए थे माँ से..
ये सोच कर के कि कहाँ जा रही है माँ , ये सब भी कोई कहने वाली बात है …
ये सोच कर के कि कहाँ जा रही है माँ , ये सब भी कोई कहने वाली बात है …
पर कह दिया कि मम्मी " we love you " .. तुमने जितने अच्छे से हमें बड़ा किया है कोई नहीं कर सकता था । हमारी सारी गलतियों क साथ हमसे प्यार किया । न जाने कितनी बार हम लोगों ने तुमको hurt किया कभी कुछ गलत बोल कर , कभी कुछ गलत कर के । पर आज please उन सब के लिए माफ़ कर दो …. sorry mummi please मान जाओ और मत जाओ .. हमलोग नहीं रह पाएँगे तुम्हारे बिना ।
उस एक पल में हम सब माँ के गले ऐसे लगे थे जैसे पहले कभी नहीं लगे थे ।
वो feeling , वो warmth, वो अपनापन माँ से हमेशा मिला था । पर आज पहली बार हम माँ को वो एहसास दे रहे थे ।
आज वो सब कह रहे थे उनसे --- जो उनके " जिंदा रहने पर कभी नहीं कह पाए थे " …
उस एक पल में हम सब माँ के गले ऐसे लगे थे जैसे पहले कभी नहीं लगे थे ।
वो feeling , वो warmth, वो अपनापन माँ से हमेशा मिला था । पर आज पहली बार हम माँ को वो एहसास दे रहे थे ।
आज वो सब कह रहे थे उनसे --- जो उनके " जिंदा रहने पर कभी नहीं कह पाए थे " …
पर पगली ये तो सपना था न । इसलिए माँ वापस आ गई थी । असल ज़िन्दगी में तो लोग वापस नहीं आते हैं ना ।
पर तभी आँख खुल गई और आंसू सच में आँखों से बह रहे थे । उठके बोला thank God सपना था , फिर एहसास हुआ की सपना था इसलिए माँ वापस आ गई थी और वो सब कह पाई जो नहीं कहा था ।
असल ज़िन्दगी में सच में, हम लोग ये सब कहने और दिखाने के लिए इंतज़ार करते रहते हैं टालते रहते हैं । जाने किस दिन का इंतज़ार करते रहते हैं ।
सही वक़्त का ? यही वक़्त सही है ।
जब वो हमारे पास . हमरे साथ हैं । इससे सही कुछ कभी नहीं हो सकता है ।
जो कहना है अभी कह दो , अभी कर दो । मरने के बाद हम किसी के लिए ताजमहल भी बनवा दिए तो क्या । वो प्यार उस तक पहुँच सकता है ? नहीं न ।
इसलिए जितना जीना है अभी जी लो , हर फीलिंग , हर लम्हा , हर रिश्ता अभी है --- बस अभी !!
सही वक़्त का ? यही वक़्त सही है ।
जब वो हमारे पास . हमरे साथ हैं । इससे सही कुछ कभी नहीं हो सकता है ।
जो कहना है अभी कह दो , अभी कर दो । मरने के बाद हम किसी के लिए ताजमहल भी बनवा दिए तो क्या । वो प्यार उस तक पहुँच सकता है ? नहीं न ।
इसलिए जितना जीना है अभी जी लो , हर फीलिंग , हर लम्हा , हर रिश्ता अभी है --- बस अभी !!
उन्हें अभी एहसास करा दो , कि आप उनसे कितना प्यार करते हो । उनके लिए वही ताजमहल है , वही हज , वही तीर्थ ।
Love You Mumma - PApa !
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