Thursday, 12 March 2015

एक डरावना सपना फिर एक कड़वी सच्चाई ! an eye opener !!

आज एक डरावना सपना देखा । फिर एक बार सच्चाई से रूबरू हुई …
                         " माँ चली गई थी "
 वो दुनिया से हमेशा के लिए जा रही थी और  उसको पता चल गया था  . बहोत  रोका  पर नहीं रुकी  .
सपना कुछ यूँ था ..

माँ को पता था  की वो जाने वाली है , वो तैयारियां कर रही थी । 
अपने लिए नहीं -- हम लोगों के लिए , हमेशा की तरह ।  जिस तरह मम्मी जब नाना या दादी के  घर जाती थी,  दो दिन के लिए भी , तो हमारे लिए खाने का पूरा सामान बना कर फ्रिज और कैसरोल में रख कर जाती थी । सब चीज़ें  सामने रख कर जाती थी जिससे कुछ भी ढूँढना न पड़े । आंटा  गूंधने में हम लोगों क हाथ न दुखें इसलिये । 
अभी उनके बनाये खाने का स्टॉक ख़तम भी नहीं होता था और वो वापस आ जाया करती थी -- हर बार ।  बिलकुल पहले के जैसे ही माँ इस बार भी जाने की तईयारी  में थी , पर इस बार वो खाना नहीं बना रहीं थी । बेचारी समझ ही नहीं पा रही थी की क्या बनाएं की बच्चों के लिए  हमेशा के लिए पूरा पड़ जाये ।
हाँ मगर तैयारियों के लिए वक़्त कम था इसलिए वो हमें सब कुछ बता देना चाहती थी … जैसे :

  • सारा सामान कैसे कहाँ पर रखा हुआ है । 
  • चाबियाँ कहाँ हैं । 
  • मम्मी के गहने कहाँ पर रखें हैं और वो उन्होंने कब लिया था सारी  यादों के साथ । 
  • पापा की कौन सी  क्या आदत है उनको कब क्या चाहिए होता है । 
  • पापा को गुस्सा आता है तो क्या  करते  है। 
  • भैया का ध्यान रखना है । छोटा है न वो । जैसे हमेशा कहती हैं उसके बारे में।
  •  उसको डांटना नहीं ।
  •  अपनी तबियत का खयाल रखना । MRI करवा लेना । डांस मत करना । 
  • बहन  जब ज्यादा सीरियस हो जाए मेरे जाने के बाद तो उसको समझा देना , वो तो समझदार है , समझ जाएगी । 

ये सब बातें जो वो आज बता रही थी , न जाने कितनी बार बता चुकी थी बचपन से । पर उसके मायने  , आज पहली बार समझ आ रहे थे.. 
आज माँ कर हर एक शब्द मुझे अक्षर-सह  याद है क्यूंकि मुझे पता था की शायद ये  -- 
        आखिरी हो ।


अचानक सपने  में  फिर वो दिन आ गया जिसकी तैयारियां माँ ने पहले ही कर दी थी । घर रिश्तेदारों से भरा हुआ था । माँ नहीं थी पर सारा काम माँ के supervision में ही  हो रहा था । जैसे उसने plan किया था , जैसा बताया  था बिलकुल वैसे ही। लोग माँ को ले कर जाने वाले थे । पर तभी मुझे और  मेरी बहन को एक confusion हुई की माँ  ने क्या देने को कहा था  " बिछिया" या "अंगूठी" । हम दोनों परेशान  थे और सोच रे थे की माँ ने क्या कहा था । समझ नहीं आ रहा था । लग रहा था की काश माँ होती तो तुरंत clear कर देती ।  हमने मन ही मन एक बेवकूफी वाली बात करी , सपना जो था , की माँ अगर तुम सुन रही हो तो please एक आखिरी बात बता देना फिर भले  सो जाना ।
सपने की हद तो तब हुई जब माँ सच में उठ गई और उसने बोला   " बताया  तो था की क्या करना है , तुम लोगों को कुछ याद नहीं रहता , बताया था ना की अंगूठी सोने की है तुम लोगों के काम आएगी  , बस बिछिया डाल  देना , सस्ती है, उसी में जाने देना मुझे  "

उस एक पल माँ के लौट आने से लगा की जन्नत मिल गई हम लोगों को.   हम तीनो माँ से चिपक गए और बोले की माँ रुक जाओ । आज वो सब बोलने के लिए थोडा सा वक़्त मिल गया था जो अब तक नहीं बोल पाए थे माँ से.. 
ये सोच कर के कि  कहाँ जा रही है माँ , ये सब भी कोई  कहने वाली बात है …

पर कह दिया  कि  मम्मी   " we love you " .. तुमने जितने अच्छे से हमें बड़ा किया है कोई नहीं कर सकता था । हमारी  सारी  गलतियों क साथ हमसे प्यार किया । न जाने कितनी बार हम लोगों ने तुमको hurt किया कभी कुछ गलत बोल कर , कभी कुछ गलत कर के । पर आज please उन सब के लिए माफ़ कर दो ….  sorry mummi please मान जाओ और  मत जाओ ..  हमलोग नहीं रह पाएँगे तुम्हारे बिना ।
 उस एक पल में हम सब माँ के गले ऐसे लगे थे जैसे पहले कभी नहीं लगे थे ।
 वो feeling , वो warmth, वो अपनापन माँ से हमेशा मिला था । पर आज पहली बार हम  माँ को  वो एहसास दे रहे थे । 
आज वो सब कह रहे थे उनसे  ---  जो उनके  "  जिंदा रहने पर कभी नहीं कह पाए थे "  …

पर पगली ये तो सपना था न । इसलिए माँ वापस आ गई थी । असल ज़िन्दगी में तो लोग वापस नहीं आते हैं ना  ।

पर तभी  आँख खुल गई और आंसू सच में आँखों से बह रहे थे ।  उठके बोला thank God सपना था , फिर एहसास हुआ की सपना था इसलिए माँ वापस आ गई थी और  वो सब कह पाई  जो नहीं कहा  था ।
असल ज़िन्दगी में सच में,  हम लोग ये सब कहने और दिखाने  के लिए इंतज़ार करते रहते हैं टालते रहते हैं । जाने किस दिन का इंतज़ार करते रहते हैं ।
 सही वक़्त का  ? यही वक़्त सही है । 
जब वो हमारे पास . हमरे साथ हैं  । इससे सही कुछ कभी नहीं हो सकता है । 
जो कहना है अभी कह दो , अभी कर दो । मरने  के बाद हम किसी के लिए ताजमहल भी बनवा दिए तो क्या । वो प्यार उस तक पहुँच सकता है  ?  नहीं न । 
इसलिए जितना जीना है अभी जी लो , हर फीलिंग , हर लम्हा , हर रिश्ता अभी है --- बस अभी !!
उन्हें अभी एहसास  करा दो , कि  आप उनसे कितना प्यार करते हो । उनके लिए वही ताजमहल है , वही हज , वही  तीर्थ ।
 Love You Mumma - PApa !

No comments:

Post a Comment