Tuesday, 25 June 2013

जिंदगी से आसान तो उस "रिश्ते" की मौत होती


वो अब तक मेरे रग में बसता था  ,
उसके बिन ना पूरी पहचान मेरी  ..
हर सोच मेरी खुद ही रचता  था  ..
अब उसको जैसे तैसे ,
कुछ भूले वादों ,
अच्छी यादों ,
मेहेज़   औपचारिकताओं ,
 और बकवास दिखावे के बल पर जिन्दा रखना पड़  रहा है ..
इस जिंदगी से आसान  तो उस "रिश्ते" की मौत होती शायद ...

ऐसा सोच के हँसी आती है मुझे , और रोना भी ...

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