वो अब तक मेरे रग में बसता था ,
हर सोच मेरी खुद ही रचता था ..
अब उसको जैसे तैसे ,
कुछ भूले वादों ,
अच्छी यादों ,
मेहेज़ औपचारिकताओं ,
और बकवास दिखावे के बल पर जिन्दा रखना पड़ रहा है ..
इस जिंदगी से आसान तो उस "रिश्ते" की मौत होती शायद ...
ऐसा सोच के हँसी आती है मुझे , और रोना भी ...
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